Sant Kabir Das Jayanti 2024: जानें धार्मिक महत्व और इससे जुड़ी खास बातें

15वीं सदी के प्रसिद्ध भक्ति काल के कवि संत कबीरदास की जयंती ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस वर्ष यह पर्व 22 जून, 2024 को मनाया जाएगा। इस मौके पर चलिए जानते हैं कबीरदास से जुड़े कुछ खास बातें।

"ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोय, औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए।" इस दोहे को सुनते ही कबीरदास का नाम ज़ुबान पर आ जाता है। 

कबीर जयंती कब है?

भक्ति काल के प्रसिद्ध कवि कबीरदास ने न जाने कितने दोहे और रचनाओं से लोगों को प्रेरणा दी है। वे न सिर्फ एक कवि और लेखक थे बल्कि समाज सुधारक भी थे। 

कबीरदास के लेखन का भक्ति आंदोलन पर गहरा प्रभाव पड़ा था। प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा को संत कबीरदास जयंती मनाई जाती है और इस वर्ष यह 22 जून को मनाई जाएगी।

कबीरदास का जन्म उत्तर प्रदेश के जौनपुर, वाराणसी में 1440 ईस्वी में हुआ था। उनके जन्म के बारे में यह भी मान्यता है कि रामानंद गुरु के आशीर्वाद से एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से उनका जन्म हुआ था।

कबीरदास का जीवन:

समाज के डर के कारण उस महिला ने उन्हें काशी के लहरतारा नामक स्थान पर छोड़ दिया था, जिसके बाद उनका पालन-पोषण एक जुलाहे ने किया।

ऐसी मान्यता है कि कबीरदास पढ़े-लिखे नहीं थे। उन्होंने अपने जीवन में बिना कलम और स्याही को हाथ लगाए चारों युगों की बातों को अपने मुखारविंद से लिख दिया था। कबीरदास के अनपढ़ होने का वर्णन उनकी रचना 'कबीर-बीजक' की एक साखी में बताया गया है।

अनपढ़ होने के बावजूद लिखी कई रचनाएं:

इस साल कबीरदास की 647वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 21 जून की सुबह 07:31 पर होगी और इसकी समाप्ति 22 जून को सुबह 06:37 पर होगी। 

कबीर दास जयंती पर याद किया जाता है कवि कबीर:

कबीरदास की रचनाओं का प्रमुख भाग सिख गुरु अर्जन देव द्वारा एकत्र किया गया था और उनकी रचनाओं को सिख धर्मग्रंथ 'गुरु ग्रंथ साहिब' में सम्मिलित किया गया है।

कबीरदास के उपदेशों के अनुयायियों के लिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है। यह दिन कबीरदास के अविनाशी ज्ञान और उनके सामर्थ्य को याद दिलाने का काम करता है।

कबीर दास जयंती का महत्व:

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