Veer Savarkar Jayanti 2024 : वीर सावरकर को ख़ास बनाती हैं ये बातें

Veer Savarkar Jayanti :विनायक दामोदर सावरकर स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रवादी नेता थे। चलिए, उनके जीवन से जुड़ी कुछ ख़ास बातें जानते हैं।

वीर सावरकर को विनायक दामोदर सावरकर के नाम से भी पहचाना जाता है। वीर सावरकर एक स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ, वकील, लेखक, समाज सुधारक और हिंदुत्व दर्शन के सूत्रधार थे। 

उनका जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र में नासिक के पास भागपुर गांव में हुआ था। उनके तीन भाई-बहन थे। 

वीर सावरकर ने 12 साल की आयु में वीर उपनाम अर्जित किया था, जब उन्होंने एक समूह के खिलाफ छात्रों का नेतृत्व किया, जिन्होंने उनके गांव पर हमला किया था। चलिए, उनके जीवन के बारे में कुछ तथ्य देखें।

1. 1901 में विनायक दामोदार सावरकर ने यमुनाबाई से शादी की, जो रामचंद्र त्रयंबर चिपलूनकर की बेटी थीं।

2. 1923 में सावरकर ने 'हिंदुत्व' शब्द को स्थापित किया। उन्होंने कहा कि भारत केवल उन्हीं का है, जिनके पास यह पवित्र भूमि और उनकी पितृभूमि है।

3. वीर सावरकर ने अपनी पुस्तक 'हिंदुत्व' में दो राष्ट्र सिद्धांत की स्थापना की। जिसमें हिंदुओं और मुसलमानों को दो अलग-अलग राष्ट्र कहा गया।

4. उन्होंने राष्ट्रध्वज के बीच में धर्म चक्र लगाने का सुझाव दिया था, जिसे राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने माना था।

5. सावरकर पहले राजनीतिक बंदी थे और उन्हें फ्रांस पर बंदी बनाने के कारण हेग के इंटरनेशनल कोर्ट में मामला पहुंचा।

6. उन्हें पहले क्रांतिकारी माना गया और उन्होंने बंदी जीवन समाप्त होने के बाद कुरीतियों के खिलाफ आंदोलन शुरू किया।

7. वीर सावरकर ने अंडमान के एकांत कारावास में जेल की दीवारों पर कविताएं लिखी, फिर उन्हें याद किया। जेल से छुटने के बाद पुनः कविताओं को लिखा।

8. सावरकर द्वारा लिखी गई पुस्तक 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस-1857' एक सनसनीखेज किताब रही।

9. उन्हें विश्व के पहले ऐसे लेखक माना गया, जिनकी कृति 1857 का प्रथम स्वतंत्रता को 2 देशों ने प्रकाशन से पहले ही प्रतिबंधित कर दिया था।

10. उनकी स्नातक उपाधि को स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण अंग्रेज सरकार ने वापस ले लिया था।

11. वीर सावरकर पहले भारतीय राजनीतिज्ञ थे, जिन्होंने विदेशी वस्त्रों की होली जलाई थी।

12. उन्होंने इंग्लैंड के राजा के प्रति वफादारी की शपथ लेने से मना किया था, जिस कारण उन्हें वकालत करने से रोक दिया गया था।

1. महान लक्ष्य के लिए गया कोई भी बलिदान व्यर्थ नहीं जाता है।

वीर सावरकर के अनमोल विचार:

2. उन्हें शिवाजी को मनाने का अधिकारी है, जो शिवाजी की तरह अपनी मातृभूमि को आजाद कराने के लिए लड़ने के लिए तैयार हैं।

3. अपने देश की, राष्ट्र की, समाज की स्वतंत्रता हेतु प्रभु से की गई मूक प्रार्थना भी सबसे बड़ी अहिंसा का द्योतक है।

4. देश हित के लिए अन्य त्यागों के साथ जन-प्रियता का त्याग करना सबसे बड़ा और ऊंचा आदर्श है।

5. हमारे देश और समाज के माथे पर एक कलंक है- अस्पृश्यता। जब तक हम ऐसे बनाए हुए हैं, तब तक हमारे शत्रु हमें परस्पर लड़वाकर, विभाजित करके सफल होते रहेंगे। इस घातक बुराई को हमें त्यागना होगा।

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